कुछ भी तो नहीं बदला इन सालों में,

कुछ भी तो नहीं बदला इन दो सालों में, वक़्त अपनी रफ़्तार पर है. लगता है सब कुछ वैसा है जैसा छह सालों पहले हुआ करता था, ना तुम्हारा फोन, ना मैसेज, ना मुलाक़ात, जैसे तुम उस वक़्त मेरे लिए अजनबी हुआ करती थी वैसे ही आज भी, इन दो सालों में शायद एक बार... Continue Reading →

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बस तुम ही हो!

लोग आते हैं! लोग जाते हैं! पर न तुम आइ थी न तुम गयी हो! तुम जबसे हो बस तुम ही हो! एतना, उतना, जितना, कितना न जाने केतना केतना! जेतना भी प्रेम करते हैं बस तुम ही से करते हैं! पहली मुलाक़ात में ही ढेर हो गए थे हम! ऐक्सिडेंट टायिप! बड़ी बड़ी आँखों... Continue Reading →

सोच

एक उम्र से नींद को मरते देखना हमें आदी बना देता है! हम बस इतने भावनाविहीन हो जाते हैं कि कोई भी बात चौंकाती नहीं। वो दौर अब लगभग गुजर गया जिस दौर में घर का बड़ा होने पर जिम्मेदारियाँ पैदा होते ही सिर पर खड़ी रहती थीं। गिल्ली डंडा खेलते हुये भला किस कमबख्त... Continue Reading →

सोचा कि सब लिख दूं

सोचा कि सब लिख दूं ,फ़िर लगा लिखकर होगा क्या.? तुम्हारे लिए ही लिखावट होगी..तुम्हीं तुम उतरोगे..तुम्हारे एहसासों से शब्द रौशन होंगे..उनसे एहसास टपकेगें..मेंरे साथ सभी पढ़ेगें और फ़िर गुज़र जाएगें..तुम भी पढ़ोगे और शब्द-शब्द की यात्रा करते हुए गुज़र जाओगे पल भर में.रुकता तो कोई नहीं..ना लिखनें वाला और न ही पढ़नें वाला और... Continue Reading →

सुनो ना

सुनो ना! आसपास की तन्हाईंयो की शीतलहरी मे जब दम घुटने लगे तो मै बस उसी मुस्कुराहट की चादर ओढे सांस लेने की कोशिश करता हूँ जो मेरे वजूद की यादों मे कहीं ना कहीं आज भी जिन्दा है, फिर चाहे वो इस समय की ढलती शाम हो या फिर बारिश की तेज बौछारें... मेरा... Continue Reading →

रावण_फुकने_की_तैयारी

रावण के मर जाने की कोई खास ख़ुशी नहीं है हमे. हमारे फेवरेट मैथोलॉजिकल किरदार रहे है हमेशा से. बस लग रहा कहीँ महादेव बने किसी कुन्दन ने चन्दा लेने के बहाने अपनी ज़ोया को देख लिया होगा. किसी गली में कुन्दन, मुरारी और बिन्दिया रावण फूंकने की तैयारी में जुटे होंगे.

कहानियों का शहर

यह शहर कहानियों का शहर है, यहां बसती हैं कहानियां, अनगिनत कहानियां, इस शहर में रहने वाले इंसानों से अधिक कहानियां... यहां सड़कों पर चलते, संकरी - बंद सी गलियों में दौड़ते या इन खूबसूरत घाटों पर सुकून का पल बिताते, तो कहीं जलती चिताओं में जीने की वजह तलाशते...हर रोज दिख जाती हैं ऐसी... Continue Reading →

तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा।

तुमसे पहली बार मिलकर भी ऐसा लगा कि तुम्हें बरसों से जानता हूँ। और एक बात, आज जाने-अनजाने तुम्हें इम्प्रेस करने के चक्कर में मैंने तुमसे एक झूठ भी बोला था। पता नहीं तुम मेरे बारे में क्या सोचोगी? पर मैं हमारे रिश्ते की इमारत झूठ की नींव पर नहीं खड़ी करना चाहता। याद है... Continue Reading →

प्यार हो गया था उसे!

प्यार हो गया था उसे! क्लास केजी में उस लड़की से जो अपने टिफ़िन में से उसे नमकीन-पूड़ियाँ खिलाया करती थी! प्यार हो गया था उसे! सिक्स्थ क्लास में उस लड़की से जो क्लास की मौनिटर थी पर कभी "शोर मचा रहे बच्चों के नाम वाली पर्ची" में उसका नाम नही लिखती थी! प्यार हो... Continue Reading →

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