कलाकार की कलम से …

क्या कहूं कि आज खमोश रहने का मन है,
तुम होते तो शायद समझ जाते इस चुप्पी को।
बस सब वही पुरानी पुरानी सी बात है,
ख्वाबों की कतरनों मे तुम्हे देखने की कोशिश करता  हूँ।
बिखेर देता  हूँ समेटकर ज़िंदगी बार बार,
ये सोचकर कि तुम डांटने आओ शायद आखिरी बार।
हिचकियां नही आतीं क्या तुमको अब गाहे-बगाहे,
पहले जैसे ही तो याद करता  हूँ मै तुमको अब भीphoto-1469204691332-56e068855403

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